Agniveer भर्ती विवाद: हाई कोर्ट ने उठाया न्याय का सवाल
परिचय
Agniveer भर्ती का मामला हाल ही में चर्चा में आया जब कुछ युवाओं ने दावा किया कि उन्होंने पूरी तैयारी के बावजूद सेना में भर्ती नहीं हो पाए। यही वजह थी कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार और सेना को नोटिस जारी कर जवाब माँगा।
प्रमुख बिंदु
1. मामला क्या है?
2022 में हुई Agniveer भर्ती प्रक्रिया में शामिल कुछ अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि باوجود लिखित और शारीरिक परीक्षा पास करने के, उन्हें भर्ती नहीं मिल पाई — जबकि कुछ कम अंकों वाले विकल्पित हुए।
2. हाई कोर्ट का कदम
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और रक्षा मंत्रालय को नोटिस भेजा। कोर्ट ने पूछा:
- कट-ऑफ अंक क्या थे?
- चयन प्रक्रिया के मानदंड क्या थे?
- लिखित एवं शारीरिक परीक्षा में किसने कितने अंक प्राप्त किए?
- कौन-कौन चुने गए — उनके नाम क्या हैं?
न्यायाधीश ने इस मामले में पारदर्शिता पर जोर दिया और उकाया कि चयन प्रक्रिया में लोगों को भरोसा होना चाहिए।
3. अतीत का फोकस
कुछ दिन बाद, हाई कोर्ट ने यह आदेश दिया कि सभी उम्मीदवारों के obtained marks याचिकाकर्ताओं को 15 दिनों में उपलब्ध कराए जाएं। कोर्ट ने कहा कि लिखित और शारीरिक परीक्षा के अंक निजी जानकारी नहीं हैं, बल्कि सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े हैं।
4. मुख्य मुद्दे
- पारदर्शिता का अभाव: उम्मीदवारों को कट-ऑफ और अंकों की जानकारी नहीं मिली।
- अन्याय की आशंका: कुछ कम अंकियों को चयनित करना न्याय के खिलाफ माना गया।
- न्यायपालिका का हस्तक्षेप: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया में जवाबदेही होनी चाहिए।
5. Agniveer योजना परिचय
यह योजना 2022 में शुरू हुई, जिसमें युवाओं को चार साल की शॉर्ट-टर्म सेवा के बाद छोड़ दिया जाता है, और केवल कुछ को आगे बनाए रखा जाता है।
इसमें पेंशन नहीं होती, सिर्फ एक लंपस्म पैकेज मिलता है। वहीं चयन प्रक्रिया की अस्पष्टता और लम्बी अवधि मदद न होने से विवाद कायम रहा।
निष्कर्ष
इस ब्लॉग का सार यह है कि जब भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं होती, तो न्यायपालिका हस्तक्षेप करती है। युवा मेहनत करते हैं, लेकिन अगर सिस्टम उनके साथ न्याय नहीं करती — तो न्याय का प्रयास भी ज़रूरी होता है।
यह मामला सिर्फ भर्ती विवाद नहीं है — यह विश्वास, जवाबदेही और प्रणाली में सुधार की बात है।