Clerics Aur Agniveer: Permanent JCO Rank Par High Court Ki Nazar
परिचय
भारतीय सेना (Indian Army) में Agniveer Yojna आने के बाद से लगातार चर्चाओं का दौर जारी है। हाल ही में एक बड़ा मामला सामने आया है जिसमें यह कहा गया कि धार्मिक गुरुओं (Clerics) को अगर वे Agniveer सेवा के दौरान एक निश्चित समय तक कार्य करते हैं और कुछ शर्तें पूरी करते हैं, तो उन्हें सीधे Permanent JCO Rank (Junior Commissioned Officer) मिल सकती है।
यह मामला अब हाई कोर्ट की निगरानी में आ चुका है और इसे लेकर देशभर में चर्चाएँ तेज हो गई हैं। आइए जानते हैं कि पूरा मामला क्या है, Clerics और Agniveer के बीच इसका क्या संबंध है, और इसका असर भविष्य के भर्ती प्रक्रिया पर कैसा पड़ेगा।
Clerics Kya Hote Hain?
भारतीय सेना में Religious Teachers (RT) या Clerics का एक अहम रोल होता है। ये सेना में शामिल जवानों को धार्मिक मार्गदर्शन, नैतिक शिक्षा और मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं।
- ये हर धर्म से चुने जाते हैं, जैसे पंडित, मौलवी, ग्रंथी या पादरी।
- इनका काम सेना के भीतर धार्मिक एकता और मानसिक शक्ति को मजबूत करना होता है।
- अब विवाद इस बात को लेकर है कि क्या Clerics को बिना नियमित सेवा किए, सीधे स्थायी JCO Rank दी जानी चाहिए या नहीं।
Agniveer Aur Clerics Ke Beech Sambandh
Agniveer योजना के तहत युवा 4 साल की सेवा के लिए भर्ती किए जाते हैं। उनमें से 25% को आगे स्थायी नौकरी मिलती है और बाकी को बाहर कर दिया जाता है।
- Clerics के लिए कहा जा रहा है कि अगर वे इस दौरान कुछ विशेष शर्तें पूरी कर लें (जैसे Army Training, एक निश्चित दौड़ आदि), तो उन्हें Permanent JCO Rank मिल जाएगी।
- मतलब, बाकी Agniveers को जहां कड़ी प्रतियोगिता का सामना करना पड़ रहा है, वहीं Clerics को सीधे JCO पद देने की प्रक्रिया शुरू हो रही है।
High Court Ka Intervention
इस मामले पर सवाल उठने के बाद इंदौर हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार और सेना को नोटिस भेजा है।
- याचिका में कहा गया कि Clerics को इस तरह सीधे JCO Rank देना नियमों के खिलाफ है।
- क्योंकि एक सामान्य Agniveer को यह पद पाने के लिए लंबा अनुभव, प्रतियोगिता और कई परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है।
- वहीं Clerics को सिर्फ धार्मिक आधार पर यह सुविधा देना असमानता पैदा कर सकता है।
विवाद की मुख्य वजह
- असमान अवसर – बाकी Agniveer को 4 साल की सेवा के बाद भी स्थायी नौकरी की गारंटी नहीं है, जबकि Clerics को सीधे स्थायी JCO Rank मिल रहा है।
- धार्मिक आधार – सेना को हमेशा धर्मनिरपेक्ष (Secular) संस्था माना गया है, लेकिन Clerics को विशेष छूट देने से यह छवि प्रभावित हो सकती है।
- भर्ती प्रक्रिया पर सवाल – यह नीति सेना में भर्ती की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर रही है।
सेना का पक्ष
भारतीय सेना का मानना है कि:
- Clerics सेना के लिए आवश्यक हैं क्योंकि वे जवानों को मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करते हैं।
- अगर उन्हें स्थायी JCO Rank दिया जाता है, तो इससे उनके काम का महत्व बढ़ेगा और वे लंबे समय तक सेवा दे पाएंगे।
- यह भी कहा गया कि Clerics की संख्या सीमित है और उनकी भर्ती का सीधा असर बाकी Agniveers पर नहीं पड़ेगा।
भविष्य पर असर
अगर Clerics को स्थायी JCO Rank देने का निर्णय लागू होता है तो –
- सेना में धार्मिक गुरुओं की भूमिका और मजबूत होगी।
- लेकिन बाकी Agniveers के लिए यह नाराजगी और असंतोष का कारण बन सकता है।
- भविष्य में भर्ती प्रक्रिया पर न्यायिक निगरानी और भी कड़ी हो सकती है।
युवाओं की राय
- कई Agniveer उम्मीदवारों का कहना है कि यह असमानता है।
- कुछ लोग इसे सेना की मजबूरी मानते हैं क्योंकि सेना में धार्मिक मार्गदर्शन की ज़रूरत होती है।
- वहीं कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर Clerics को JCO Rank दिया जाता है तो यह अन्य भर्ती पदों के लिए नजीर (precedent) बन जाएगा।
निष्कर्ष
यह मामला सिर्फ Clerics और Agniveers तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय सेना की भर्ती नीति और धर्मनिरपेक्ष छवि से भी जुड़ा हुआ है। हाई कोर्ट का फैसला आने वाले समय में तय करेगा कि Clerics को स्थायी JCO Rank देना सही है या नहीं।
फिलहाल यह विवाद युवाओं और समाज के बीच गहन चर्चा का विषय बना हुआ है।