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Supreme Court Initiative for Braveheart Cadets 2025

By Xagniveer

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Supreme Court की cadesपहल: Braveheart Cadets के लिए नई उम्मीद

प्रस्तावना

भारतीय सेना में भर्ती होना लाखों युवाओं का सपना होता है। हर साल हजारों युवा NDA (National Defence Academy), IMA (Indian Military Academy) और अन्य अकादमियों में शामिल होकर ट्रेनिंग शुरू करते हैं। लेकिन कई बार कठोर ट्रेनिंग और कठिन परिस्थितियों के कारण कुछ कैडेट्स गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं या स्थायी विकलांगता का शिकार हो जाते हैं। ऐसे cadets को “Braveheart Cadets” कहा जा रहा है।

अब तक इन cadets के साथ एक बड़ी समस्या यह रही है कि मेडिकल ग्राउंड पर डिस्चार्ज होने के बाद न तो इन्हें ex-servicemen का दर्जा मिलता है और न ही सेना से मिलने वाले स्वास्थ्य लाभ। इन्हें केवल एक सीमित सी ex-gratia राशि मिलती है जो उनके असली इलाज और जीवनयापन के लिए पर्याप्त नहीं होती।

इसी मुद्दे पर हाल ही में भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने खुद से (suo motu) पहल की है और केंद्र सरकार व सेना प्रमुखों को जवाब तलब किया है। इस पहल को “Braveheart Cadets के लिए न्याय की दिशा में कदम” कहा जा रहा है।


1. Supreme Court की पहल क्यों ज़रूरी थी?

सुप्रीम कोर्ट ने यह मामला तब उठाया जब मीडिया रिपोर्ट्स के ज़रिए सामने आया कि:

  • 1985 से अब तक लगभग 500 cadets मेडिकल ग्राउंड पर डिस्चार्ज किए जा चुके हैं।
  • सिर्फ NDA में ही 2021 से 2025 के बीच करीब 20 cadets को गंभीर चोट या विकलांगता के कारण ट्रेनिंग छोड़नी पड़ी।
  • इन cadets को न तो ex-servicemen का दर्जा मिला और न ही सेना से मिलने वाली health schemes।
  • केवल ₹40,000 प्रतिमाह ex-gratia दी जाती है, जबकि असल इलाज पर हर महीने ₹50,000 या उससे ज़्यादा खर्च हो जाता है।

यानी जिन्हें देश की सेवा करनी थी, वही cadets बिना किसी पर्याप्त मदद के संघर्ष करने को मजबूर हो गए।


2. वर्तमान स्थिति: Braveheart Cadets को क्या मिलता है?

  • Ex-Servicemen Status नहीं: चूँकि cadets ने कमिशन प्राप्त नहीं किया, इसलिए उन्हें पूर्व सैनिक का दर्जा नहीं मिलता।
  • Health Benefits से वंचित: ECHS (Ex-Servicemen Contributory Health Scheme) जैसी सुविधाएँ नहीं मिलतीं।
  • सीमित आर्थिक मदद: केवल ₹40,000 ex-gratia दी जाती है।
  • भविष्य अंधकारमय: शिक्षा बीच में रुक जाती है और करियर का रास्ता बंद हो जाता है।

3. Supreme Court ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट की बेंच (जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन) ने इस मामले पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा:

  • ये cadets अपनी गलती से नहीं, बल्कि ट्रेनिंग के दौरान घायल हुए हैं।
  • यह occupational hazard (व्यवसायिक जोखिम) है, इसलिए इन्हें छोड़ देना अन्याय होगा।
  • सरकार चाहे तो Group Insurance Scheme लागू कर सकती है जिससे cadets को मेडिकल कवर मिल सके और सरकार पर ज़्यादा बोझ भी न पड़े।
  • अदालत ने केंद्र सरकार और तीनों सेनाओं से 4 सितंबर 2025 तक जवाब देने को कहा है।

4. Supreme Court ने कौन-कौन से प्रश्न उठाए?

  1. क्या इन cadets को Group Medical Insurance के तहत कवर किया जा सकता है?
  2. क्या इनकी ex-gratia राशि को ₹40,000 से बढ़ाया जा सकता है?
  3. क्या इन्हें alternate desk roles या अन्य भूमिकाओं में शामिल किया जा सकता है?
  4. क्या इन्हें RPwD Act (Rights of Persons with Disabilities Act, 2016) के तहत अधिकार दिए जा सकते हैं?

5. Braveheart Cadets के सामने चुनौतियाँ

  • आर्थिक संकट: इलाज और दवाइयों पर भारी खर्च।
  • मानसिक तनाव: सपनों का टूटना और परिवार की उम्मीदें अधूरी रहना।
  • सामाजिक समस्या: समाज में पर्याप्त सम्मान और पहचान न मिलना।
  • भविष्य की अनिश्चितता: नौकरी और शिक्षा दोनों छूट जाना।

6. संभावित समाधान

समाधान विवरण
Insurance Coverage Cadets को Group Insurance Scheme में शामिल किया जाए।
Ex-Gratia बढ़ाना ₹40,000 की राशि बढ़ाकर इलाज के खर्च के बराबर की जाए।
ECHS Benefits Cadets को health scheme का लाभ दिया जाए।
Desk Roles जिन cadets की शारीरिक क्षमता सीमित हो गई है, उन्हें desk jobs में शामिल किया जाए।
RPwD Act का संरक्षण Cadets को विकलांगता कानून के तहत अधिकार दिए जाएँ।

7. इस पहल का महत्व

सुप्रीम कोर्ट की यह पहल केवल कानून का मामला नहीं है, बल्कि यह उन युवाओं के लिए सम्मान और सुरक्षा की दिशा में कदम है जिन्होंने देश के लिए सब कुछ देने की ठानी थी।

  • इससे cadets और उनके परिवारों का मनोबल बढ़ेगा।
  • देश में सेना में भर्ती होने वाले युवाओं का विश्वास मज़बूत होगा।
  • सरकार पर भरोसा और जनता में सेना के प्रति सम्मान और बढ़ेगा।

8. निष्कर्ष

Braveheart Cadets देश की वास्तविक बहादुरी के प्रतीक हैं। ये वो युवा हैं जिन्होंने देश की सेवा के लिए अपना करियर और जीवन दांव पर लगा दिया। आज उनकी हालत देखकर सुप्रीम कोर्ट ने जो पहल की है, वह उम्मीद की नई किरण है।

अगर सरकार सकारात्मक कदम उठाती है तो यह cadets और उनके परिवारों के लिए नई जिंदगी की शुरुआत होगी। साथ ही, आने वाली पीढ़ी के लिए यह संदेश होगा कि देश आपकी कुर्बानी को कभी अनदेखा नहीं करेगा।

 

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